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Thursday, October 9, 2014

कोपलें फिर फूट आईं..



       (Exif: 1/40; f-5.6; 55mm; ISO 640)


       (Exif: 1/50; f-5.0; 39mm; ISO 640)


       (Exif: 1/50; f-5.0; 39mm; ISO 640)


       (Exif: 1/80; f-5.6; 40mm; ISO 640)


       (Exif:1/60; f-5.0; 40mm; ISO 640)


       (Exif: 1/25; f-5.6; 55mm; ISO 640)


       (Exif: 1/80; f-5.6; 37mm; ISO 640)


       (Exif: 1/400; f-13; 43mm; ISO 200)


       (Exif: 1/30; f-5.6; 55mm; ISO 640) 







Thursday, June 20, 2013

Random Clicks #02

प्रकृति ने पेड़-पौधों के रूप में हमें एक अनमोल तोहफा दिया है.. 'रेण्डम क्लिक्स' की दूसरी कड़ी में कुछ पेड़ पौधों की तस्वीरें 'रेण्डम' जगहों से..











Sunday, April 28, 2013

पुरी यात्रा #02 (सुर्य मंदिर, कोणार्क)

      दूसरे दिन मेरी इच्छा समुद्रतट पर सुर्योदय को अपनें कैमरे में कैद करनें की थी, पर मौसम नें हमारी इच्छा पर पानी फेर दिया.. हल्की बरसात हो रही थी और आसमान बादलों से पूरी तरह ढ़का था, ऐसे में सुर्यदेव के दर्शन असंभव थे.. होटल के कमरे में बैठे-बैठे हम आज का प्रोगाम तय कर रहे थे, इतने में एक 'टूर एण्ड ट्रेवल' वाले नें हमारे दरवाजे पर दस्तक दी, हमनें उसके द्वारा उपलब्ध करायी जा रही सारी सुविधाओं पर विचार किया और फिर कोणार्क और दूसरे दिन सतपाड़ा के लिए हमारी बात तय हो गयी, और फिर करीब आधे घंटे में हमारी कार भी होटल के दरवाजे पर खड़ी थी; आज कोणार्क जानें का कार्यक्रम था..
      करीब चालीस मिनट की ड्राईव के बाद हम कोणार्क में थे, बारिश अब लगभग थम चुकी थी; रातभर की बरसात के बाद कोणार्क का मंदिर नहा-धोकर हमारी प्रतिक्षा कर रहा था..


      मंदिर परिसर में घुसते ही मैनें अपना कैमरा 'ऑन' कर लिया था, फिर लगभग दो-तीन घंटे लगे हमें पूरा मंदिर देखनें में और इस दौरान मुझे अपनें कैमरे को 'ऑन' ही रखना पड़ा..  कोणार्क का सुर्यमंदिर अपनी विशालता, मूर्तिकला तथा वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है, ये मंदिर अब काफी जर्जर हो चला है पर पत्थरों पर की गयी ऐसी महीन नक्काशी देखनें लायक है..




      मंदिर के कई उंची जगहों पर चढ़नें, तथा कई कलाकृतियों को छूनें तक की इजाजत नहीं है.. इस मंदिर की कल्पना सुर्यदेव के रथ के रुप में की गयी है, जिसमें चौबीस पहिए लगे हैं और जिसे सात घोड़े खींच रहे हैं..




      कई नक्काशियां, खासकर, पत्थरों से बने हाथियों को मारते दो बड़े सिंह आपको मंदिर निर्माण के उस काल में ले जाकर आश्चर्य और भावुकता से भर देते हैं..
 

      सुर्यमंदिर के पीछे छायादेवी का मंदिर है और उसके पीछे  ईंट का मंदिर..
 

      चार-पांच चक्कर लगाये बिना आप इस पूरे मंदिर को अच्छी तरह से नहीं देख सकते..






















      मंदिर परिसर में 'भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग' द्वारा बनाया गया पार्क भी सराहनीय है..






      मंदिर के चारों ओर एक 'पाथवे' बनाया गया है जो कुछ खास तो नहीं है पर अगर आप इस भव्य मंदिर को अलग अलग कोणों से देखनें के इच्छुक हैं या फिर फोटोग्राफी का शौक रखते है, तो ये 'पाथवे' काफी उपयोगी सिद्ध हो सकता है..








      मंदिर से मुख्य मार्ग तक की सड़क दोनों ओर दुकानों से भरी है, यहां ओडिसा के खास स्क्रिपचर्स, मंदिरों की प्रतिकृति और हैंडीक्राफट्स की दुकानें हैं, पुरी या कोणार्क से जुड़ी वस्तुएं लेनें के ये अच्छे स्त्रोत साबित हो सकते हैं..
      यहां से 'चंद्रभागा बीच' थोड़ी ही दूरी पर है, जहां पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहता है, कोणार्क से पुरी का रास्ता काफी रमणीक है, लगभग पूरे रास्ते एक ओर जहां समुद्र है तो दूसरी और 'बालूखण्ड वाइल्डलाईफ सेंक्चुरी', बहुतायत में काजू के पेड़ भी आपको इस रास्ते के किनारे देखनें को मिलेंगे.. पुरी से कोणार्क तक का रास्ता 'पुरी कोणार्क मरीन ड्राइव' के नाम से जाना जाता है.. इस रास्ते में कई मंदिर भी हैं जिसके पुजारियों द्वारा रास्ते में बार बार आपकी कार को रोक दिया जाता है, और मंदिर के नाम पर बीस-पचास रुपए लेनें के बाद ही छोड़ा जाता है..
      देर शाम हमारा स्वर्गद्वार जाना हुआ, यहां का समुद्रतट काफी लोकप्रिय है, जिसे 'गोल्डन बीच' कहा जाता है.. बीच पर कुछ देर टहलनें के पश्चात् हम किनारे सुस्ताने लगे, रात होते होते यह तट एक छोटे मार्केट का रुप ले लेता है जो देर रात तक गुलजार रहता है; यहां पुरी से जुड़ी वस्तुएं काफी सस्ते में खरीदी जा सकती हैं..

      अब पुरी यात्रा की तीसरी कड़ी में हम सतपाड़ा जानें वाले हैं जहां का 'चिलका लेक' विश्व प्रसिद्ध है.. पुरी यात्रा की ये श्रृंखला आपको कैसी लग रही है? ये आप हमें कमेंट कर बता सकते हैं या आप हमें drishti@suhano.in पर इ-मेल भी कर सकते हैं..



Saturday, March 16, 2013

Random Clicks #01

   कभी कभी यूँही हम कुछ ऐसी तस्वीरें अपनें कैमरे में कैद कर लेते हैं, जो उस वक्त कुछ खास नहीं लगतीं.. पर बाद में जब इत्मिनान से हम सारी तस्वीरों पर  निगाह डालते हैं तो हमारी नजर उन तस्वीरों पर ठहर सी जाती है और ये दिल बरबस ही कह उठता है: 'अरे वाह..!!'..
   'Random Clicks' की श्रृंखला उन खास तस्वीरों को एक धागे में पिरोने का प्रयास है..






वैसे.. 'Random Clicks' जरा जँच नहीं रहा.. अगर आपके मन में इस श्रृंखला के शिर्षक के लिए कोई बेहतर विकल्प है तो कृपया सुझाएँ...