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Sunday, December 18, 2016

Making of a Panorama


   पिछले दिनों दोबारा 'गौतमधारा जल प्रपात' जाने का मौका मिला.. यह रांची से करीब 40 की०मी० की दूरी पर स्थित एक बहुत ही सुन्दर जलप्रपात है..

   सीढ़ीयां उतरकर जब आप इस बेहतरीन झरनें को देखते हैं तो दंग रह जाते हैं, यह बहुत ही प्राकृतिक वातावरण में है और यहां आपको ऋतु-अनुसार स्थानीय फल भी बिकते मिल जाएंगे जो बहुत ही स्वादिष्ट होते हैं..


   जलप्रपात के सामनें पानी का एक प्राकृतिक बड़ा कुंड बना है जो यहां आने वालों को बहुत आकर्षित करता है..


   ऐसी प्राकृतिक जगहों पर आकर एक बात जो महसूस होती है वह है प्रकृति की विशालता, जो हमारी आंखो में तो समा जाती है पर हमारे कैमरे में नहीं समा पाती..


   इस विशालता को कैमरे में कैद करने के लिए या तो हम 'Wide Angle' लेंस का उपयोग कर सकते हैं, पर उसमें भी 'resolution' सीमित होनें से थोड़ी कमी रह जाती है, या हम पैनोरमा (Panorama) मोड में फोटोग्राफी कर सकते हैं..

   पैनोरमा कई फोटोग्राफ्स को आपस में जोड़कर बनाया जाता है जिससे एक वृहद दृश्य वाला फोटोग्राफ बनता है, यह देखने में बहुत ही सुन्दर लगता है..

   स्मार्टफोन्स में कई एप्स 'पैनोरमा' लेने के लिए होते हैं, और कुछ नए कैमरे भी इस फीचर के साथ आते है.. पर सबसे अच्छा तरीका अलग-अलग फोटोग्राफ्स लेकर उसे 'फोटोशोप' की सहायता से पैनोरमा में बदलना ही है..

   इसका तरीका भी बहुत आसान है, 'सीरीज़' में 'ओवरलैप' करते हुए चित्र लीजीए और सभी को फोटोशोप में इम्पोर्ट कर स्टीच कर लीजिए.. एक शानदार पैनोरमा तैयार है.. :)

   सीरीज मे ओवरलैप करते हुए चित्र लेने का मतलब है: क्योंकि पैनोरमा बहुत से चित्रों को मिलाकर बनेगा, तो हमें कई चित्र लेनें होंगे, और हर चित्र एक दूसरे को ओवरलैप करते हुए एक ही दिशा में आगे बढ़ते हुए लेना है... 'Tripod' का इस्तेमाल करें तो बेहतर है, इससे आपका लेवल सही रहेगा..



   1) फोटोग्राफ्स लेने के बाद 'फोटोशोप' के 'File' मेन्यु में जाकर 'Automate' और फिर 'Photomerge' को चुन लीजिए..
   2) यहां 'Browse' में जाकर वो सारे फोटोग्राफ्स चुनकर 'OK' पर क्लिक कर दीजिए..



   3) ध्यान रखिए, बाईं तरफ 'लेआऊट' में 'Auto' चुना हुआ हो और नीचे 'Blend Images Together' और 'Geometric Distortion Correction' दोनों चुना हुआ हो..
   4) अब यहां फिर से 'OK' करना है..

   अब आगे का काम फोटोशोप खुद कर लेगा, और आपको एक शानदार पैनोरमा सामनें दिखाई देगा.. जरूरत के हिसाब से 'क्रोप' कर लीजिए और आपका पैनोरमा तैयार है:






Saturday, March 21, 2015

योगदा सत्संग सखा आश्रम


   जब भी हम दिल से कोई इच्छा करते हैं, तो वह देर-सबेर जरूर ही पूरी होती है.. जब मैं यहां पिछली बार आया था तो यहां की हरियाली और खूबसूरती ने मेरा मन मोह लिया था, और कैमरा साथ न लाने की गलती से बहुत पछतावा भी हुआ था.. पर जब दुबारा यहां आने का मौका हाथ लगा तो मैं पूरी तरह तैयार था..
   'योगदा सत्संग सखा आश्रम', रांची के दिल मे बसता है.. शहर के बीचो-बीच ऐसी मनोरम और प्राकृतिक जगह बहुत कम देखने को मिलती है..








   यहां का स्मृति भवन खास है.. सफेद संगमरमर से बना यह मंदिर एक छोटे ताजमहल जैसा दिखता है.. किसी भी कोने से यह आपका ध्यान खींच ही लेता है..








   ध्यान मंदिर यहां की सबसे शांत जगह है, यहां भीतर ध्यान और प्रवचन होते हैं..








   परमहंस योगानंद जी का कमरा, और उनकी इस्तेमाल की हुई कुछ चीजें भी यहां संजो कर रखी गईं हैं.. यह लीची का वृक्ष भी खास है, क्यूंकि इसी पेड़ के नीचे वे अपने शिष्यों को ज्ञान दिया करते थे..






   अमेरिका से आए केविन ने हमें पूरा आश्रम घुमाया और हमारे समूह के साथ कई जानकारियां भी  बांटी और यह भी कि कैसे वे सिर्फ एक किताब पढ़कर योगानंद जी के दर्शन से ऐसे प्रभावित हुए कि सीधे भारत आ पहुंचे..




   प्रकृति, ध्यान, शांति और आनंद के ऐसे बेजोड़ संगम में आ कर हमारा पूरा समूह भी बहुत प्रभावित था...








Sunday, December 28, 2014

फूलों से सुन्दर..


      मैं एक बात अक्सर कहता रहता हूँ कि इस दुनियां मे शायद फूलों से सुन्दर कुछ भी नहीं..  और शायद इसलिए ही हमें सुन्दरतम् की उपमा हमेशा फूलों से ही देनीं पड़ती है.. फूलों के रूप में यह एक जादू है जो प्रकृति ने हमें यूं ही दे दिया है.. 'यूँ ही' इसलिए क्यूंकि और ढ़ेर सारी बहुमुल्य चीजों की तरह इनकी कोई विशेष उपयोगिता नहीं है, ये यूं ही खिल जाते है..

      इस बार आपके लिए कुछ सुन्दरतम् फूल रांची के 'जैव विविधता उद्यान' से..




      इस उद्यान में गुलाबों का एक अलग बागीचा है, जिसमें कई तरह के गुलाब देखे जा सकते है:




      और तरह तरह के फूल पूरे परिसर में फैले है, जो यहां घुसते ही आपका ध्यान आकर्षित करते है..






      यहां के जलीय उद्यान में खिला यह नील कमल:









      जिस तेज गति से समय भागा जा रहा है, इससे बिलकुल पता ही नहीं रहता कि कब एक पूरा वर्ष बीत गया, और कब नया साल दस्तक देने लगा.. बहरहाल, नए वर्ष के आगमन पर मैं सभी मित्रों से बस यही कहना चाहता हूँ कि जीवन सौन्दर्य से भरपूर है, इसे देखें, महसूस करें, इसे पूरी तरह से जीएँ.. नया साल एक खाली किताब सा है, और पेन आपके हाथ मे है; आप इसमें अपने लिए एक खूबसूरत सी कहानी लिख सकते हैं.. और मेरी शुभकामनाएं तो हमेशा आपके साथ हैं ही..

      इन फूलों सा ही सुन्दर आपका नव वर्ष भी हो.. :)


Thursday, November 13, 2014

गीतांजलि

      कुछ चित्र हमें अपनें आप से जोड़ते हैं.. एक भाव जो उस चित्र से जुड़ा होता है, हर बार उस चित्र के सामने आते ही वह भाव भी प्रबल होकर ह्रदय में मचलने लगता है..





       इस फूल को जब मैने देखा था, ये जिस तरह छुपा हुआ मुझे निहार रहा था.. मुझे लगा जैसे मुझे ये कुछ याद दिला रहा है.. ऐसे भी छुप-छुप कर देखने मे एक खूबसूरती होती है.. फिर इसे देखते देखते पता नहीं कब मेरा ह्रदय अनायास गीतांजलि के इस गीत में डूब गया...

"Aamar hiyar majhe lukiye chile dekhte aami paai ni..
Tomay dekhte aami paai ni..
Bahir pane chokh melechi,aamar hridoy pane chaai ni.."


      जो बेंगोली नहीं समझते, वे नीचे इसका अंग्रेजी अनुवाद देख सकते हैं..

"Thee were hidden in my heart, so I could't find thou art, I didn't see thou art..
My eyes wandered all outsides, I didn't peeked my inside.."

      कितनी अच्छी तरह व्यक्त किया है इसे रवीन्द्रनाथ नें, शायद सबसे अच्छी तरह.. गीतांजलि मेरे सबसे प्रिय काव्यों में से एक है, जब भी फुर्सत हो आप इसमें डूब सकते हैं.. पूरी तरह.. और फिर जब आप गोता लगा कर वापस लौटते है, आपके हाथ में कुछ मोती होते हैं.. और ये मोती आपको फिर फिर वापस गोता लगाने के लिए आमंत्रित करते हैं...



Thursday, October 9, 2014

कोपलें फिर फूट आईं..



       (Exif: 1/40; f-5.6; 55mm; ISO 640)


       (Exif: 1/50; f-5.0; 39mm; ISO 640)


       (Exif: 1/50; f-5.0; 39mm; ISO 640)


       (Exif: 1/80; f-5.6; 40mm; ISO 640)


       (Exif:1/60; f-5.0; 40mm; ISO 640)


       (Exif: 1/25; f-5.6; 55mm; ISO 640)


       (Exif: 1/80; f-5.6; 37mm; ISO 640)


       (Exif: 1/400; f-13; 43mm; ISO 200)


       (Exif: 1/30; f-5.6; 55mm; ISO 640) 







Thursday, March 20, 2014

Experimental Shots

हाल ही में मैंने एक नया DSLR लिया है. शुरुआत से ही कई फोटोग्राफर बंधुओं से इसके लिए सुझाव मिलते रहें हैं.. एक Compact कैमरे में भी कई खूबियां होती हैं, मसलन इसका छोटा आकार, कम वजन, इत्यादि.. पर इसकी कई सीमाएं भी होती हैं. फोटो क्वालिटी के मामले में अक्सर ही ये मात खा जाता है, खास कर अगर रोशनी थोड़ी कम हो.. SLR की आप्टिकल क्वालिटी भी बेहतरीन होती है, इसके अलावे जरूरत के हिसाब से हमें लेंस बदलने की सुविधा भी मिलती है.. इन्हीं सारी खूबियों के मद्देनजर आखिर मुझे भी अंतत: इसका चुनाव करना ही पड़ा..

इस बार होली में जब छुट्टी मिली, तो मुझे मौका मिला अपने नए कैमरे को परखने का.. उन्ही प्रयोगात्मक छायाचित्रों में से कुछ आपके लिए: